Saturday, 13 June 2020

अगर इतनी जल्दी संभल जाता ( Agar Itni Jaldi Sambhal Jata )

अगर इतनी जल्दी संभल जाता 
दिल का मतलब ही बदल जाता

बड़ा असां हो जाता मरना मेरा
वो सच में दिल से निकल जाता

जो बैठ लेता साथ मेरे पल भर
परिंदो जैसे ये परिंदा भी मचल जाता

बोलते इतनी रंजिश थी मोहब्बत में
तुम्हारे निगलने से पहले खुदको निगल जाता

ऐसे उबला हूं यादों में उसकी
की कड़ाई चढ़ा दे तो उबल जाता

कोई नहीं आया मजबूर सफर में
आ जाता तो मेरा सिक्का भी चल जाता

Thursday, 11 June 2020

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है ( Is Pipal ke Sab Patte Jhadne Wale )

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है 
अब कहा वो हमको पढ़ने वाले है 

खुदको छोड़ दिया हमने यही सोच 
के पत्थर भी कहा पिघलने वाले है 

उनको देखो वो घर बाँटने चले 
क्या सच में दो भाई लड़ने वाले है 

फर्क ना इसको है ना उसको है 
मुफ्त में रासन सब मांगने वाले है

बाग़ में खिलने से डर रहे है फूल 
बाहर बेटियों को भी नोचने वाले है 

इंसान तुझको शर्म क्यों नहीं आती 
घरो के सब ही दीये बुझने वाले है

Saturday, 6 June 2020

ग़ज़ल - दो रोटी वाला मुहब्बत करने चल दिया था ( Do Roti Wala Mohbbat Karne Chal Diya Tha )

की हकीकत ने मुझको दिखा दिया मुझको 
मीठा भी कड़वा होता है बता दिया मुझको

मेने घर फुक दिया अपने ही हाथो अपना 
किसी ने दुनिया क्या सीखा दिया मुझको 

दो रोटी वाला मुहब्बत करने चल दिया था 
शुक्रिया फिर से मकाम पे ला दिया मुझको 

मुझको पानी की तलब थी शराबी नहीं था 
उसने ही लबो से गम पिला दिया मुझको 

मैं सोने चला था एक अलग ही दुनिया में 
माँ ने कॉल किया और उठा दिया मुझको
 
मजबूर लिखता है सीने में दर्द उठता है 
बस मुहब्बत ने शायर बना दिया मुझको

पत्तो से ही सही पर घर बना मुझको ( Patton Se HI Sahi Par Ghar Bana Mujhko )

इनायत नहीं मुहब्बत दिखा मुझको 
पत्तो से ही सही पर घर 'बना' मुझको 
 
मैं अब बहुत परेशां हूँ इस सफर से 
आगे का सफर अब तू 'बता' मुझको 

दर्स-ऐ-दर्स सीखा रही है ये दुनिया 
मोहब्बत कैसे होती है 'सीखा' मुझको

तकदीर का काटा मैं भी कांट सकू 
अपने हाथो की लकीरे 'थमा' मुझको 

अर्श देख-देख आखें लाल हो चुकी 
बिंदी ही समझ माथे पे 'सजा' मुझको 

मोहब्बत नहीं 'मजबूर' बोल मुझको 
कही मर ना जाऊ अब 'भुला' मुझको 

इनायत नहीं मुहब्बत दिखा मुझको 
पत्तो से ही सही पर घर 'बना' मुझको


Friday, 5 June 2020

सब कुछ कर मिया.. 'प्यार' ना कर ( Sab Kuch Kar Miya .. " Pyar Nar Kar " )

अपना समझ बैठ.. 'इंतज़ार' ना कर
सब कुछ कर मिया.. 'प्यार' ना कर

अदब से खेलते है.. ये मतलब वाले
अपने ही आइने में.. तू 'वार' ना कर

शिकार पे निकला है तो शिकार कर
पर घायल परिंदे का 'शिकार' ना कर

जिन ईटो ने संभाला है कल तुझको
उन ईटो की तबियत 'बीमार' ना कर

गलती से जो बह गया आंख से पानी
फिर से उनका पानी 'बेकार' ना कर

अपना समझ बैठ.. 'इंतज़ार' ना कर
सब कुछ कर मिया.. 'प्यार' ना कर

Ghazal

Meri Behan Chali Tu Jayegi | itzskushwaha Poetry

एक दिन अपने कंगन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी सबका मायूस सा मन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी कुछ दिन ये घर सुनसान लगेगा तेरे यहां ना होने से इन...

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