अगर इतनी जल्दी संभल जाता
दिल का मतलब ही बदल जाता
बड़ा असां हो जाता मरना मेरा
वो सच में दिल से निकल जाता
जो बैठ लेता साथ मेरे पल भर
परिंदो जैसे ये परिंदा भी मचल जाता
बोलते इतनी रंजिश थी मोहब्बत में
तुम्हारे निगलने से पहले खुदको निगल जाता
ऐसे उबला हूं यादों में उसकी
की कड़ाई चढ़ा दे तो उबल जाता
कोई नहीं आया मजबूर सफर में
आ जाता तो मेरा सिक्का भी चल जाता