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Thursday, 11 June 2020

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है ( Is Pipal ke Sab Patte Jhadne Wale )

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है 
अब कहा वो हमको पढ़ने वाले है 

खुदको छोड़ दिया हमने यही सोच 
के पत्थर भी कहा पिघलने वाले है 

उनको देखो वो घर बाँटने चले 
क्या सच में दो भाई लड़ने वाले है 

फर्क ना इसको है ना उसको है 
मुफ्त में रासन सब मांगने वाले है

बाग़ में खिलने से डर रहे है फूल 
बाहर बेटियों को भी नोचने वाले है 

इंसान तुझको शर्म क्यों नहीं आती 
घरो के सब ही दीये बुझने वाले है

Ghazal

Meri Behan Chali Tu Jayegi | itzskushwaha Poetry

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