की हकीकत ने मुझको दिखा दिया मुझको
मीठा भी कड़वा होता है बता दिया मुझको
मेने घर फुक दिया अपने ही हाथो अपना
किसी ने दुनिया क्या सीखा दिया मुझको
दो रोटी वाला मुहब्बत करने चल दिया था
शुक्रिया फिर से मकाम पे ला दिया मुझको
मुझको पानी की तलब थी शराबी नहीं था
उसने ही लबो से गम पिला दिया मुझको
मैं सोने चला था एक अलग ही दुनिया में
माँ ने कॉल किया और उठा दिया मुझको
मजबूर लिखता है सीने में दर्द उठता है
बस मुहब्बत ने शायर बना दिया मुझको
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