Wednesday, 10 January 2024

Meri Behan Chali Tu Jayegi | itzskushwaha Poetry

एक दिन अपने कंगन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी

सबका मायूस सा मन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी


कुछ दिन ये घर सुनसान लगेगा तेरे यहां ना होने से

इन कदमों की छन छन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी


सारा कर्जा चुकता कहकर वो मेरी पागल बहना

वर्षों की जलन चुभन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी 


पीछे मुड़ मुड़ देखेंगे तुझको रोता हुआ चेहरा लेकर

जब आंसू भरा दामन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी 


कौन करेगा सही वक्त पर पापा मम्मी की केयर को

यही उलझन वुलझन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी 


शायद उस दिन इस चहरे पर मायूसी छा जाएगी

एक बैग में सारा बचपन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी

- @itzskushwaha 




Saturday, 3 October 2020

Majboor - Sher



काश वो इतना मक्कारी ना करता
तो शायद 'मजबूर' श्यारी ना करता

 

बातो का यकीं नहीं तेरा ज़हन कैसा है
आपका बचपना तो नहीं गुरूर पैसा है  

आप ज़्यादा हो अभी हम बहुत ही कम है
हम धोकेबाज नहीं आँखों में कुछ शर्म है 


ये सुनते ही सबके मुँह फिर गए
तेज हवाओ में मेरे घर गिर गए


हुनर खुद निकलेगा वैसे ही हाथो से
जैसे बुलबुले निकलते है बच्चो के झाग से


तुम क्या चुन रहे हो इस छोटे से बाग़ से
बेवज़ह ही खेल रहे हो अकेले आग से

Tuesday, 15 September 2020

Hamre Jaane Ke Baad Hamara Chasma Tumko Dhudhega

शरद आस्मां मेँ एक पुराना नशा तुमको ढूढ़ेगा
हमारे जाने के बाद हमारा चश्मा तुमको ढूढ़ेगा

लोग सो जायेंगे दोपहर के थके - हारे घरो मेँ
तब रातों की धुंध मेँ इक अँधेरा तुमको ढूढ़ेगा

इक रोज फिर मै तुमको सताने आ सकता हूँ
जब कोई नया दीवाना हम जैसा तुमको ढूढ़ेगा

लोग ढूढेंगे नक्शो मेँ नए नए शहरों के नाम
पर हर नज़र मेँ हमारा ही चेहरा तुमको ढूढ़ेगा

मुझको शक है इसलिए तुमको छुपा रहा हूँ में
जो भी तुम्हारे नाम को देखेगा तुमको ढूढ़ेगा

मर जाएगी मोहब्बत 'मजबूर' की उस रोज़ ही
जिस रोज़ उसका दबा हौसला तुमको ढूढ़ेगा



Saturday, 13 June 2020

अगर इतनी जल्दी संभल जाता ( Agar Itni Jaldi Sambhal Jata )

अगर इतनी जल्दी संभल जाता 
दिल का मतलब ही बदल जाता

बड़ा असां हो जाता मरना मेरा
वो सच में दिल से निकल जाता

जो बैठ लेता साथ मेरे पल भर
परिंदो जैसे ये परिंदा भी मचल जाता

बोलते इतनी रंजिश थी मोहब्बत में
तुम्हारे निगलने से पहले खुदको निगल जाता

ऐसे उबला हूं यादों में उसकी
की कड़ाई चढ़ा दे तो उबल जाता

कोई नहीं आया मजबूर सफर में
आ जाता तो मेरा सिक्का भी चल जाता

Thursday, 11 June 2020

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है ( Is Pipal ke Sab Patte Jhadne Wale )

इस पीपल के पत्ते झड़ने वाले है 
अब कहा वो हमको पढ़ने वाले है 

खुदको छोड़ दिया हमने यही सोच 
के पत्थर भी कहा पिघलने वाले है 

उनको देखो वो घर बाँटने चले 
क्या सच में दो भाई लड़ने वाले है 

फर्क ना इसको है ना उसको है 
मुफ्त में रासन सब मांगने वाले है

बाग़ में खिलने से डर रहे है फूल 
बाहर बेटियों को भी नोचने वाले है 

इंसान तुझको शर्म क्यों नहीं आती 
घरो के सब ही दीये बुझने वाले है

Saturday, 6 June 2020

ग़ज़ल - दो रोटी वाला मुहब्बत करने चल दिया था ( Do Roti Wala Mohbbat Karne Chal Diya Tha )

की हकीकत ने मुझको दिखा दिया मुझको 
मीठा भी कड़वा होता है बता दिया मुझको

मेने घर फुक दिया अपने ही हाथो अपना 
किसी ने दुनिया क्या सीखा दिया मुझको 

दो रोटी वाला मुहब्बत करने चल दिया था 
शुक्रिया फिर से मकाम पे ला दिया मुझको 

मुझको पानी की तलब थी शराबी नहीं था 
उसने ही लबो से गम पिला दिया मुझको 

मैं सोने चला था एक अलग ही दुनिया में 
माँ ने कॉल किया और उठा दिया मुझको
 
मजबूर लिखता है सीने में दर्द उठता है 
बस मुहब्बत ने शायर बना दिया मुझको

पत्तो से ही सही पर घर बना मुझको ( Patton Se HI Sahi Par Ghar Bana Mujhko )

इनायत नहीं मुहब्बत दिखा मुझको 
पत्तो से ही सही पर घर 'बना' मुझको 
 
मैं अब बहुत परेशां हूँ इस सफर से 
आगे का सफर अब तू 'बता' मुझको 

दर्स-ऐ-दर्स सीखा रही है ये दुनिया 
मोहब्बत कैसे होती है 'सीखा' मुझको

तकदीर का काटा मैं भी कांट सकू 
अपने हाथो की लकीरे 'थमा' मुझको 

अर्श देख-देख आखें लाल हो चुकी 
बिंदी ही समझ माथे पे 'सजा' मुझको 

मोहब्बत नहीं 'मजबूर' बोल मुझको 
कही मर ना जाऊ अब 'भुला' मुझको 

इनायत नहीं मुहब्बत दिखा मुझको 
पत्तो से ही सही पर घर 'बना' मुझको


Ghazal

Meri Behan Chali Tu Jayegi | itzskushwaha Poetry

एक दिन अपने कंगन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी सबका मायूस सा मन लेकर मेरी बहन चली तू जायेगी कुछ दिन ये घर सुनसान लगेगा तेरे यहां ना होने से इन...

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